कांग्रेस 2014 के बाद लगातार पतन की ओर अग्रसर,नही हे कोई प्रभावशाली नेता जो पार्टी का नेतृत्व कर सकें! पढ़िए...

दोस्तो आज हम बात करेंगे "इंडियन नेशनल कांग्रेस" की,जो 70 वर्षो तक भारत की राजधानी में स्थापित रही या यू कहे की पूरे देश में उसी की सरकार रही है! आजादी के बाद भले ही कुछ राज्यों में किसी दूसरी पार्टी की सरकार रही हो लेकिन दबदबा कांग्रेस का ही रहा है, आज वो किस हाल में है, देश के कितने राज्यों में उसकी सरकार है!
2014 के बाद जब से "मोदी लहर" की जो आंधी शुरू हुई है तब से कांग्रेस की सरकार धूल में उड़ती हुई नजर आ रही है!
देखते ही देखते कांग्रेस मात्र नाम की रह गई है, जिसका कारण शायद परिवारवाद या कुछ और हो..
पिछले 7 वर्षो में इतनी बुरी तरह से पिटी है कि तड़प रही एमजीआर सांसे थम नहीं रही है!
‌2014 के बाद जितने भी विधानसभा चुनाव हुए है उसमे सिर्फ कांग्रेस को हार ही मिली है कुछ राज्यों को छोड़ कर जैसे पंजाब और राजस्थान !
पंजाब और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार शायद इसलिए है की पंजाब एक ऐसा राज्य है जो कृषि क्षेत्र में बाहुल्य है, दूसरी बात भारत पूर्व प्रधानमंत्री ओर महान अर्थशास्त्री डॉक्टर मनमोहन सिंह पंजाब राज्य से ही आते है!
‌राजस्थान में कांग्रेस की सरकार शायद इसलिए है की राज्य में सरकार की भी पंच वर्षीय योजना है,पांच वर्ष कांग्रेस की सरकार तो पांच वर्ष बीजेपी की सरकार,दूसरी बात यहां पर कांग्रेस के दो प्रभावशाली
नेता है जिसमे एक तो वर्तमान में कांग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और दूसरे पूर्व उपमुख्यमंत्री और अध्यक्ष सचिन पायलटवर्तमान में कांग्रेस की घातक दुर्दशा है,पार्टी ने मुस्लिम कम्युनीटी को अपना वोट बैंक बनाया है, मुस्लिम नेताओं को भी एक ही खूंटे से बांध कर रखा है ! बाबरी मस्जिद के अलावा ऐसे कई मुद्दे है जिस पर कांग्रेस ने मुसलमानों को हमेशा धोखा दिया है! कांग्रेस ने हर जगह मुस्लिम कॉम को बलि का बकरा बनाया है!
हाल ही में कांग्रेस राजसभा सांसद गुलाम नबी आजाद अपने कार्यकाल से रिटायर्ड होते ही जम्मू में G 23 की मीटिंग बुलाकर, राजस्थान में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री दुर्रू मियां ने कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की सरपरस्ती में मीटिंग बुलाकर ये साबित कर दिया की कांग्रेस ने मुसलमानों को सिर्फ इस्तेमाल किया है,उन्हें दरी बिछाऊ गैंग तक ही सीमित रखा है!
एक समय था जब कांग्रेस में मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे नेता थे!
कांग्रेस की कुरूर नितियो का फायदा बीजेपी ने बड़ी नजाकत से फायदा उठाया,लेकिन बीजेपी इससे खतरनाक साबित हुई आगे चर्चा करेंगे इसके बारे में...
कांग्रेस में अब प्रभावशाली नेता नहीं है,डॉक्टर अहमद पटेल पार्टी के सलाहकार भी रह चुके थे,लेकिन वे अब इस दुनिया में नही हे!
पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी अपने बेटे राहुल गांधी को पार्टी का अध्यक्ष बनाना चाहती है, बनाया भी था लेकिन नेताओ की मनमुटाव के चलते खुद को फिर से अध्यक्ष बनना पड़ा,अब अगला अध्यक्ष कोन होगा जून जुलाई खबर आएगी! इसके अलावा पार्टी में कोई भरोसेमंद नेता नही बचा जिसे पार्टी की कमान दे दी जाए!
कुछ ऐसे नेता भी है प्रभाव शाली जो पार्टी की कमान संभाल सकते है, लेकिन या तो पार्टी अध्यक्ष का उन पर विश्वास नही है तो कोई अपनी स्वार्थ के उलझनों में उलझा है!
जिसमे गुलाम नबी आजाद,अशोक गहलोत और सचिन पायलट जैसे नेता हे!
गुलाम नबी आजाद पार्टी में अच्छे और प्रभाव शाली नेता माने जातें है लेकिन हाल ही में उन्होंने G 23 मीटिंग बुलाकर पार्टी से अंदरूनी बगावत कर ली है जिससे पार्टी का उन पर से विश्वास डगमगा गया है, पार्टी उन्हें कभी अध्यक्ष नही बना सकती!
दूसरी तरफ गहलोत पायलट की बात की जाए तो दोनो नेता पहुंची हुई चीज है ,दोनो अच्छे और प्रभाव शाली नेताओ में गिने जाते है, लेकिन कुछ ऐसे मुद्दे है उनके पास अपने स्वार्थ के लिए , जिससे पार्टी पर कुछ भी असर पड़े उन्हें कोई फर्क नही पड़ता ! दोनों में नाराजगी जग जाहिर है!
गहलोत वर्तमान में राजस्थान के मुख्य मंत्री है और राजस्थान में गांधी और जननायक के नाम से जाने जाते है! 
सचिन के राजस्थान के अलावा मध्यप्रदेश में अच्छी पकड़ है !
गहलोत और पायलट दोनो में इस कदर में मुटाव हे की गहलोत ने पायलट पर बीजेपी में जाने के आरोप लगा दिए थे,उन्हें अध्यक्ष पद ओर उपमुख्यमंत्री से हटा दिया था! गहलोत को चाहिए की राजस्थान की कमान सचिन को दे कर खुद केंद्र में जाए ओर पार्टी की बागडोर संभाले!
इससे शायद डूबते हुए को तिनके का सहारा मिल जाए,इस के अलावा दूसरा कोई उपाय नहीं है की पार्टी फिर मजबूती के साथ खड़ी हो!
पार्टी का दोगलापन,विशेष समुदाय को टारगेट करना,ही उसकी बर्बादी का कारण है

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