पठानकोट एयरबेस,उरी सेक्टर, पुलवामा अटैक और अब छत्तीसगढ़ नक्सली हमला!! पढ़े पूरी जानकारी...
दोस्तों आज हम बहुत ही अहम मुद्दे पर चर्चा करने वाले हे!
बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ नक्सली हमले के बारे में,बहुत ही कायराना हरकत हुई है हमारे जवानों पर,इसकी जितनी निंदा की जाए उतनी ही कम हे!!
लेकिन सोचने वाली बात ये है की सीआरपीएफ के जवान छत्तीसगढ़ की पहाड़ियों में रह रहे नक्सलवादियों पर ऑपरेशन करना,लेकिन बीच रास्ते में ही उन पर नक्सलियों द्वारा आत्मघाती हमला कर दिया गया है,नक्सलियों को ये सब केसे पता था की सीआरपीएफ के जवान उन पर ऑपरेशन करने आ रहे है और मोका देखते ही हमला कर दिया!
इससे साफ जाहिर होता है की उन नक्सलियों के तार किसी संगठन या राजनितिक दल से जुड़े हुए है,ओर उन्हें इस ऑपरेशन की जानकारी उन्ही संगठन , राजनीतिक दल से पहले ही मिल गई हो!!ये पहले ऐसा मामला नही है इससे पहले भी ऐसा हो चुका है!
"उरी"
18 सितंबर 2016 को ये आत्मघाती हमला उरी के आर्मी बेस के मुख्यालय के पास हुआ था,जिसमे 16 जवान शहीद हो गए थे!! सवाल ये है की आर्मी मुख्यालय इतना सुरक्षित होने के बावजूद वहा इस तरह का हमला होना अपने आप में एक वजह है!!पठानकोट एयरबेस
ये हमला पंजाब के पठान कोट एयर बेस 2 जनवरी 2016 को हुआ था,हमलावर 8 मीटर की दीवार फांदकर आया था,जिसमे 7 जवान शहीद हो गए थे और 37 जवान घायल हो गए थे!!
यहां सवाल खड़ा होता है कि हमलावर दिवार फांदकर कर अंदर आया था,क्या कोई उसे रोकने वाला नही था!! तो कहीं न कही ये मामला पहले से सुनियोजित किया गया था!पुलवामा अटैक
14 फरवरी 2019 को जम्मू कश्मीर के पुलवामा क्षेत्र में बहुत ही खतरनाक हमला हुआ था,जिसमे 40 से ज्यादा हमारे जवान शहीद हो गए थे और कई घायल हो गए थे!
RDX भरी मारूति इको जिस रास्ते से हो कर सीधे जवान से भरी बस से टकराई और देखते ही देखते बस और जवानों के चीथड़े हो गए!! क्या कोई वहा चेक पोस्ट नही थी,किसी ने उस गाड़ी को रोका तक नही??
जवाबी कार्यवाही में सर्जिकल स्ट्राइक की गई और दुश्मनों को उनके ठिकानों सहित तबाह कर दिए!
लेकिन आज तक ये बात साफ नही हुई ही की ये सब मामले सुनियोजित,सटीक तरीके से हुए केसे?
हाल ही में मुकेश अंबानी के घर के बाहर खड़ी स्कॉर्पियो जिसमे संग्धित वस्तुएं मिली थी, सब पता लगा लिया सारी गुत्थी सुलझा दी! लेकिन जब देश के जवानों की बात आती है तो ये जवाबी कार्यवाही का हवाला देकर अपने आप को साफ करना चाहते है,जवाबी कार्यवाही करना जाहिर है करनी ही पड़ती है अगर नही करते तो बात बैठेगी नही,राजनीति तो इनको करनी ही पड़ती है ,मगर ये नही बताते की ज्यादा की तादाद में एक साथ सैनिकों पर आत्मघाती हमले होते केसे है?छत्तीसगढ़ नक्सली हमला सुनियोजित तरीके से हुआ हे,नक्सलियों को पहले से ही मालूम था की उन पर ऑपरेशन होने वाला है, सूत्रों के अनुसार...जरा सोचे तिरंगे लिपटी लाशे किसके गई है कोई सत्ता पाने में लगा है तो कोई सत्ता बचाने में!चुनाव में राजनीतिक पार्टीया शहीदों के नाम पर अपना काफी हद तक वोट बैंक बढ़ा लेती है है मगर ये नही बताते की इस तरह सोची समझी साजिशो के पीछे किस संगठन ,या किस पार्टी का हाथ है या नही,ओर इसे केसे रोका जाए !!
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